Awards / Children

हमने राष्ट्रपति के हाथ से एवॉर्ड तो दे दिया पर बच्चो को स्कूल नहीं भेज पाये ….

 

छोटाउदेपुर के २ समुदाय की एक तकनीक थी हरियाली हांड़ी उनको हमने २०१३ में राष्ट्रपति के हाथ से एवॉर्ड दिया था. लेकिन एवॉर्ड तो हमने दे दिया पर उनके पोते और बच्चे  आज भी पढाई करने नहीं जाते थे वो दो परिवार के बच्चे बकरी चराने का काम करते हे या अपने छोटे भाई बहन  को सँभालने का काम करते हे तो हनी बी परिवार के लिए दुखद बात थी के हमने उनको एवॉर्ड देदिया पर बच्चो को स्कूल नहीं भेज पाये।

८ सप्टेम्बर को उनलोगो की  मुलाकात की तब पता चला फिर हमने उन बच्चो को स्कूल लेगये और उनका दाखिल किया उस वकत काफी धिकत का सामान करना पड़ा क्योकि जो बच्चो को शिष्यवृति सरकार के और से मिलती हे उनको नहीं मिल सकती हे तो उनके लिए हमें पंच केश करना पड़ा फिर  एड्मिसन हो गया अशोकभाई(9979049148) ने पूरा सहियोग किया और देहवाट प्राथमिक शाला में उनकी पढाई सुरु होगई हे.और शिक्षक की बात अच्छी लगी के आज से ५०% जमेदारी आपकी और ५०%हमारी ये भावना बहुत अच्छी लगी और ऐ बच्चे एक दिन नहीं गए थे तो फोन कर के बताया के आप के बच्चे आज नहीं पहोचे स्कूल तो हमें भी अच्छा लगा.

कनलवा में जब हमने हरियाली हांड़ी बनाने वाले परिवार से जब मिले तो वहा पर भी ऐशे बच्चे मिले  जो ८ साल का था लेकिन स्कूल नहीं जाता था तो उनसे बात की तो वो बोला के में स्कूल गया तो बकरी कोण चराने के लिए जायेगा तो परिवार को समजाया तो परिवार में से एक सवाल आया के बच्चा जायेगा पर उनको खर्चा कोण देगा तो हमने जम्मेदारी ली अब बच्चे को पूछा तो वो मना कर रहा हे हमने २ घंटे उनका हाथ पकड़ कर बेठा और समजाया फिर बच्चे ने बोला कल से स्कूल जावुगा” स्कूल पहोचा ना वो हमारी जम्मेदारी थी और नहीं जाना वो उनकी इच्छा थी”पर हमने भी थान लिया था के उनको प्रेसर करके नहीं भेजना हे उनको समजाकर भेजना हे फिर वो खुद बोला में तैयार हु जाने के लिए फिर स्कूल में ले गये तो एक स्कूल ने मना किया के आप जैसे लोग यहाँ आकर एक दिन छोड़ के चले जाते हो फिर ये बच्चे नहीं आते हे मेने कहा के वो आएगा वो जम्मेदारी मेरी हे पर फिर उनका नाम पूछा तो उन्होंने बोला ये बच्चे तो तवरा प्राथमिक शाला में जाते हे तो यहाँ हम दाखिल नहीं कर सकते हे तो उन बच्चे  लेकर हम तवरा स्कूल पहोचे और वहा बात की तो वह भी काफी समस्या के बाद दिनेशभाई (9979049184 ) ने सहियोग किया ऐसे २ बच्चो का ऐडमिशन करवाया जो अभीतक उनहोने स्कूल नहीं देखी थी और दो बच्चे थे उनको नियमित स्कूल जाये ऐशी व्यवस्था करवाई जो कभी कभी जाते थे तो उनको भी हरोज जाने के जिए बोला और हमारा एक इन्नोवेटर को भी समजाया के पांच बच्चे बहुत हे अब ज्यादा बच्चे को शिक्षा देना बहुत मुश्किल हे.
जब बच्चो के लिए कपडे खरीद ने के लिए गया था तब बच्चो के चहेरे पर जो ख़ुशी थी वो में बता नहीं सकता दूसरे दिन किरण को स्कूल जाने के लिए बोलना नहीं पड़ा खुद स्कूल चला गया हम सब के लिए ४ बच्चो के चहरे पर ख़ुशी लानेका  अवसर मिला.

हमने ऐ दोनों परिवार को एवॉर्ड तो दिल्ही में राष्ट्रपति के हाथो से राष्ट्रपतिभवन में दे दिया पर आज भी  गाँव वालो को पता नहीं हे के उनको इतना बड़ा सन्मान मिला हे क्योकि उनको बताना नहीं आता हे और हमने कभी उनके गाव में जाकर बताया नहीं हे तो उनके लिए भी हमें सोचना पड़ेगा

जब बच्चो को कपडे खरीद ने के लिए दुकान पर लेगया और उनको बोला के तुम्हे कोनसा पसंद हे तो उन्होंने हमें बताया के ऐ कपडे मुझे पसंद हे तो मेने पूछा के अब तुम्हे केसा लगा तो बोला अभी तक हम दूसरे कपडे ले कर आते थे और हम पहेनते थे आज पहिली बार हमने कूद पसंद कर के वो कपडे पहने हे अब ऐसे बच्चो के हाथ में बेग किताब और कपडे होगे न तो उनको पढाई करने की उत्सुकता आएगी और सामाजिक परिवर्तन दिखेगा

हमारे समाज में ऐसे भी समुदाय हे के उनकी जरुरत पूरी  काफी लोग बैठे हे और ऐसे भी समुदाय हे के पूरी करने की बात तो दूर रही केवल क्या जरुरत हे वो पूछने वाला भी कोय नहीं हे तो हम सब को इस काम को आगे बढ़ाने की जरुरत हे

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